khubchand baghel chhattisgarh : खूबचंद बघेल जी जाने इनकी खास बाते

 

khubchand baghel chhattisgarh | खूबचंद बघेल जी छत्तीसगढ़

खूबचंद बघेल जी का नाम शयद ही छत्तीसगढ़ का कोई व्यक्ति न जानता हो | खूबचंद बघेल जी छत्तीसगढ़ के एक महान समाज सेवक  थे जिन्होंने पुरे भारतवर्ष में समाजिक चेतना जागृत की | खूबचंद बघेल जी छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे | खूबचंद बघेल जी एक महान व्यक्तित्व के धनी थे | खूबचंद बघेल जी ही वे प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने अलग छत्तीसगढ़ का सपना देखा था | खूबचंद बघेल जी के ही अद्वितीय प्रयासों से छत्तीसगढ़ को एक अलग पहचान मिली है |

खूबचंद बघेल जी का जीवन परिचय

खूबचंद बघेल जी छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख समाज सेवक थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन लोगो की सेवा में बिता दिया | खूबचंद बघेल जी का जन्म 19 जुलाई सन 1900 को भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले में स्थित पथरी ग्राम में हुआ था | डॉ. खूबचंद बघेल जी के पिता जी का नाम जुड़वांन प्रसाद जी है तथा उनकी माता जी का नाम श्रीमती केकती बाई जी है | खूबचंद बघेल जी का विवाह श्रीमती राजकुंवर जी से हो गया | डॉ. खूबचंद बघेल जी छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वप्न दृष्टा के रूप में माने जाते है |

खूबचंद बघेल जी छत्तीसगढ़
खूबचंद बघेल जी छत्तीसगढ़

खूबचंद बघेल जी की शिक्षा

डॉ. खूबचंद बघेल जी के प्रारम्भिक शिक्षा उनके अपने गाँव पथरी में स्थित प्राइमरी स्कूल से हुयी | खूबचंद बघेल जी ने अपने आगे की पढाई रायपुर के सरकारी हायर सेकंडरी पूरी की | खूबचंद बघेल जी डाक्टर बनना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने नागपुर में स्थित रॉबटसन मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया | और इसी दौरान उन्होंने LMP की डिग्री प्राप्त की | खूबचंद बघेल जी ने सन 1923 में LMP की परीक्षा पास की | इसके बाद सरकार ने इसे बदलकर MBBS कर दिया

विवाह और संतान

डॉ. खूबचंद बघेल जी का विवाह बहुत ही काम उम्र में करा दिया गया था | जी समय उनकी शादी हुयी उस समय वे प्राइमरी की शिक्षा ले रहे थे | उस समय उनकी उम्र केवल 10 साल थी और उनकी शादी 3 साल की राजकुंवर जी से करा दिया गया | दोनो की 3 बेटिया हुयी जिनका नाम पार्वती , राधा , और सरास्वती है | उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति नही हो रहा था | और इसी पुत्र मोह के कारन उन्होंने डॉ. भारत भूषण बघेल जी को गोद लिया |

डॉ. खूबचंद बघेल जी का राजनितिक सफ़र

डॉ. खूबचंद बघेल जी ने सन 1931 में अपनी सरकारी नौकरी से त्याग पत्र देकर उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी में सदस्यता ली और कार्यकर्ता बने | इससे पूर्व डॉ. खूबचंद बघेल जी ने सन 1930 में रायपुर महाकौशल राजनितिक परिषद् के अधिवेशन में हिस्सा लिया था | इसके बाद डॉ. खूबचंद बघेल जी सन 1931 रायपुर के डिक्टेटर और और बाद में राज्य के आठवे डिक्टेटर नियुक्त हुए थे | जिला डिक्टेटर के पद पर कार्य करते हुए डॉ. खूबचंद बघेल जी ने समाज के प्रति लोगो में जागरूकता फैलाई |

डॉ. खूबचंद बघेल जी रायपुर तहसील से सन 1946 में कांग्रेस के चुनाव में निर्विरोध चुने गये | सन 1946 में डॉ. खूबचंद बघेल जी को तहसील कार्यालय कार्यकारणी के अध्यक्ष चुने गये थे | भारत के आजादी के बाद उन्हें प्रांतीय शासन ने संसदीय सचिव नियुक्त किया | सन 1950 में आचार्य कृपलानी के कहने पर वे कृषक मजदुर पार्टी में शामिल हुए | सन 1951 के बाद वे विधान सभा चुनाव के लिए निवाचित हुए | डॉ. खूबचंद बघेल जी सन 1965 तक वे विधायक बने रहे थे | सन 1965 मे ही वे राज्यसभा के लिए चुने गये थे |

डॉ. खूबचंद बघेल जी का राजनितिक सफ़र
डॉ. खूबचंद बघेल जी का राजनितिक सफ़र

स्वतन्त्रता में योगदान

डॉ. खूबचंद बघेल जी भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी शासकीय नौकरी को छोड़कर सन 1930 में उन्होंने गांधी के साथ आन्दोलन में हिस्सा लिया | सन 1942 में उन्हें भारत छोडो आन्दोलन में भाग लेने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था | वर्ष 1931 में डॉ. खूबचंद बघेल जी ने सत्याग्रह आन्दोलन में भाग लने के लिए उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया था |

सामाजिक कार्य

डॉ. खूबचंद बघेल जी ने जब से अपने होंश संभाले थे उन्हें हर जगह पर जातिगत भेद भाव का सामना करना पड़ा था | इसी जाति गत भेद भाव वे काफी चिढ़ते थे | उन्होंने जातीगत भेद भाव को समाप्त करने का काम किया | उन्होंने समाज से उच नीच का भेद भाव मिटाया | उस समय छत्तीसगढ़ में सतनामियो को नीची नजरो से देखा जाता था | उस समय नाई सतनामियो के बाल काटने को राजी नही होते थे उन्होंने इसका बहिस्कार किया | इस कारन उन्हें सामाजिक बहिकार भी झेलना पड़ा था |

डॉ. खूबचंद बघेल जी की रचनाये

नाटक –

  1. ऊँच – नीच – छुआ – छुट और जातिप्रथा को काम करने के लिए इया नाटक को लिखकर मंचन किया |
  2. करम – छंडहा – यह नाटक आम आदमी की गाथा और बेबसी को लोगो के सामने लाने वाला नाटक है |
  3. जनरल सिंह – इस नाटक में डॉ. खूबचंद बघेल जी ने दब्बूपन को समाप्त करने का रास्ता सुझाया था |
  4. भारत माता – सन 1962 में भात्र चीन युद्ध में इसे लिखकर मंचन कराया गया था तथा चन्दा जुटा कर भारत सरकार के पास भेजा गया था |
डॉ. खूबचंद बघेल जी की रचनाये
डॉ. खूबचंद बघेल जी की रचनाये

डॉ. खूबचंद बघेल जी की मृत्यु

डॉ. खूबचंद बघेल जी की मृत्यु 22 फ़रवरी सन 1969 को दिल्ली में हुयी थी | खूबचंद बघेल जी उस समय राज्यसभा के सदस्य थे | और वे दिल्ली में रहते थे | और उनकी मृत्यु के बाद उनके पार्थिव शारीर को मालगाड़ी के द्वारा छत्तीसगढ़ भिजवाया गया था | इस घटना से लोग नाराज हो हए और इसका छत्तीसगढ़ में खूब विरोध हुआ इस घटना के बाद यह निर्णय लिया गया की किसी भी राज नेता के पार्थिव् शरीर को हवाई जहाज से भेजा जाएगा |

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