pragaitihasik kaal ke manav ka adhyayan : प्रागैतिहासिक काल के मानव का अध्ययन जाने इनके बारे में

 

pragaitihasik kaal ke manav ka adhyayan | शैलचित्र

प्रगैतिहासिक काल के मानव का अध्ययन एक रोचक विषय है | छत्तीसगढ़ के अंचल में प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्र का विस्तृत श्रंखला ज्ञात है | पुरातत्व की एक विधा शैलाश्रयो  का अध्ययन है | चित्रित शैलाश्रयो के चित्र के अध्ययन से विगत युग की मानव संस्कृति का उस काल के पर्यावरण एवं प्रकृति की जानकारी मिलती है | लिपि के आभाव में आदिमानव की अंत: चेतना के दर्पण ये शैलचित्र प्रागैतिहासिक काल को जानने की कड़ी है | छत्तीसगढ़ राज्य शैलचित्र की दृष्टी से अत्यंत महत्वपूर्ण है | यह मध्याश्मीय काल से लेकर एतिहासिक काल तक के शैलचित्र प्राप्त होते है | रायगढ़ , बस्तर , कांकेर , कोरिया आदि जिलो में विभिन्न क्षेत्रो में स्थित चित्रित शैलाश्रयो आदिमानव की कथा सुनते है |

pragaitihasik kaal ke manav ka adhyayan : प्रागैतिहासिक काल के मानव का अध्ययन जाने इनके बारे में
pragaitihasik kaal ke manav ka adhyayan : प्रागैतिहासिक काल के मानव का अध्ययन जाने इनके बारे में

छत्तीसगढ़ राज्य में सर्वप्रथम चित्रित शैलाश्रयो की खोज सन 1910 में एंडरसन के द्वारा किया गया था | इंडिया पेंटिंगस 1918 में तथा इसैक्लोपिडिया ब्रिटेनिका के 13वे अंक में रायगढ़ जिले के सिंघनपुर के शैलचित्र क प्रकाशन किया गया | तत्पश्चात श्री अमरनाथ दत्त ने सन 1923 से 1927 तक के मध्य सर्वेक्षण किया | डा. एन.घोस , डी. एच . गार्डेन द्वारा इस सम्बन्ध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी |

 

सिंघनपुर

रायगढ़ खरसिया रोड पर रायगढ़ से पश्चिम में 20 किलोमीटर की दुरी पर यह शैलचित्र मिलते है | सिंगनपुर शैलाश्रयो प्राचीनतम सिंगनपुर शैलाश्रयो प्राचीनतम शैलाश्रयो में से एक है | यहाँ के चित्र लगभग धुंधले हो चुके है | इनमे सिडी नुमा पुरुषाकृति , मत्स्यकन्या ( मरमेड ) , पशु आकृति , शिकार दृश्य आदि क अंकन है |

सिंघनपुर
सिंघनपुर

कबरापहड़ 

रायगढ़ जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर रायगढ़ जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर पूर्व में स्थित कबरापहाड़ के चित्र गैरिक रंग के है | ये चित्र ANY6 स्थानों से जादा सुरक्षित व् विविध प्रकार के है | यहाँ जंगली भैसा , कछुआ , पुरुषाकृति , ज्यामितिक अलंकरण क अंकन पूरक शैली में है |

 

गोटीटोला 

चारामा – कांकेर मार्ग पर लखनपुरी ग्राम से 8 किलोमीटर दूर स्थित गोटीटोला ग्राम के मधुबन पारा से 3 किलोमीटर दूर दक्षिण में पश्चिम में सीतारामगुडा स्थान पर शैल चित्र मिलते है | इनमे आखेट दृश्यो क अंकन है |

 

घोडसार

सोनहत क्षेत्र में बदरा की पहाडियों में चित्रित शैलाश्रय घोड़सार के नाम से जाना जाता है | इनमे ओअशु आकृति एवं मानव कृति सफ़ेद रंग से चित्रित लिए गये है |

कोहाबउर

जनकपुर क्षेत्र से मुरेरगढ़ की पहाड़ी पर कोहबउर चित्रित शैल चित्र स्थित है | यहाँ विभिन्न प्रकार के रंगों  से ज्यामितिक आकृति , मानवाकृति एवं आखेट दृश्यों का  चित्रं किया गया है |

 

चितवा डोंगरी

यह दल्लिराजरा मार्ग पर ग्राम सहगाव के पास स्थित है | अधिकांश चित्र लाल गेरू रंग से बने हुए है | चित्रों में मुख्य रूप चीनी आकृति खच्चर के ऊपर सवार दिखाई दे रही है इसके साथ ही एक ड्रैगन की तरह दिखाई देने वाला चित्र भी बना हुआ है |

 

बसनाझर

सिंघनपुर के दक्षिण पश्चिम में लगभग 17 किलोमीटर दूर ग्राम बसनाझर स्थित है | इस ग्राम के समीप पहाड़ी श्रृंखला में लगभग 300 से अधिक चित्र अंकित किये गये है | इनमे हाथी , गेंडा , जंगली भैंसा , आखेट दृश्य , ज्यामितिक अल्न्कर्ण , नृत्य दृश्य चित्रित है |

 

भंवर खोल

बिलासपुर से रायगढ़ मार्ग पर खरसिया से 72 किलोमीटर दूर सूतिघाट पर पतरापाली ग्राम के मध्य उत्तर में स्थित पहाड़ी श्रृंखला में चित्रित शैलाश्रय है जो भवंर खोल के नाम प्रसिद्ध है | यहाँ चित्र सफ़ेद , गैरिक , व् एनी रंगों से बना हुआ है | यहाँ मत्स्यकन्या , जंगली भैसा , भालू , शिकार दृश्य आदि चित्रित है |

 

यहाँ जाने पर कहा रुके 

छत्तीसगढ़ में विजिट करने आने पर यहाँ पर रुकने के लिए बहुत सी शानदार जगहे है आने वाले पर्यटक रायपुर में रूक सकते है | यहाँ साथ ही यः पर पर्यटकों के लिए पर्यटन मंडल के पर्यटन आवासीय भवन भी है |

कैसे पहुचे 

वायु मार्ग – रायपुर निकतम हवाई अड्डा है जो मुंबई , दिल्ली , कोलकाता , हैदराबाद , बेंगलुरु , विशाखापत्तनम चेन्नई आदि से वायु मार्गो को जोडती है  |

रेल मार्ग – हावड़ा मुंबई मुख्य रेल मार्ग पर रायपुर ओर बिलासपुर निकटस्थ रेलवे जंक्शन है |

सडक मार्ग – रायपुर से निजी वाहन से यात्रा की जा सकती है |

 

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