Japan Moon Mission : अब जापान ने भी चन्द्रमा पर कदम रख दिया है सूरज की रोशनी पड़ते ही जगा मून लैंडर

Japan Moon Mission : सूरज की रोशनी पड़ते ही जगा मून लैंडर

जापान द्वारा भेजे गए मून लैंडर ने पृथ्वी से भेजे गए संकेत का जवाब दिया इससे यह पता चला की जापान द्वारा भेजा गया लैंडर फिर से कम करने लगा | सूरज की रोशनी पड़ते ही कैसे Japan Moon Mission मून लैंडर कैसे जाग उठा जापान के अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा ने इस चमत्कार के बारे में बताया | जापान के पहले अन्तरिक्ष Moon Mission फॉर इन्वेस्टिगेटिंग (SLAM) को 20 जनवरी को चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग किया था |

 

Japan Moon Lander
Japan Moon Lander

पृथ्वी से जापन के पहले मून लैंडर को संकेत भेजा गया था जिससे यह पता चला की Japan Moon Lander दूसरी चन्द्र रात से बच गया | इस ऐतिहासिक कदम के बाद जापन पांचवा ऐसा देश बन गया जो चाँद पर पंहुचा |

 जापान के अन्तरिक्ष एजेंसी जाक्सा ने बताया की चंद्रमा पर लैंडिंग के दौरान SLAM लैंडर गलत दिशा में गिर गया था जिसकी वजह से लैंडर के सौर पैनल तक सूरज की रोशनी नही पहुँच रहा था लेकिन लैंडिंग के 8 वे दिन जैसे ही सूरज की रोशनी लैंडर पर पड़ी वैसे ही लैंडर SLAM से सम्पर्क हुआ |

जापान के अन्तरिक्ष एजेंसी जाक्सा यह बताया की उस समय चाँद में दोपहर होने की वजह से SLAM लैंडर का तापमान 100 डिग्री सेल्सियस से पहुच गया था | इस लिए इस रविवार को सम्पर्क कम समय के लिए हुआ जैसे ही लैंडर SLAM का तापमान कम होगा वैसे ही लैंडर से सम्पर्क स्थापित करने की तैयारी है | अन्तरिक्ष एजेंसी जाक्सा ने बताया की लैंडर को चन्द्रमा के ठंडी रातो के हिसाब से नहीं बनाया गया था | चंद्रमा पर तापमान शून्य से 170 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है |

 

जापान ने क्यों रोका तह अपना मून मिशन?

जापान अपने पहले मून मिशन को 28 अगस्त को लांच करना चाहता था लेकिन मौसम के ख़राब होने की वजह से इस मिशन को स्थगित करना पड़ा | जापान अपने पहले मून मिशन को ‘एच2ए रॉकेट’ से लांच करने की तैयारी में थे मगर तेज हवाओ के चलते इसे लांच नहीं किया जा सका |

 

जाने जापान के मून मिशन क्या है ?

जापान इस Moon Mission के लिए लम्बे समय से कम कर रहा था | इस मून मिशन में कई चीजे सामिल है | इस मिशन में चन्द्रमा में जाँच कार्य के लिए स्मार्ट लैंडर SLAM को सबसे पहले लैंड करवाना है | जापान की अन्तरिक्ष एजेंसी एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन (JAXA) ‘एच2ए रॉकेट’ के जारिए अपना लैंडर चाँद पर भेंजेंगे | जापान के इस मिशन को मून स्नाइपर के नाम से जाना जाता है | इसमें हाई टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है |

अन्तरिक्ष एजेंसी एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन (JAXA) 'एच2ए रॉकेट'
अन्तरिक्ष एजेंसी एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन (JAXA) ‘एच2ए रॉकेट’

 

ये है जापान के मून मिशन की खास बाते

जापान के इस Moon Mission के लिए जापान के अन्तरिक्ष एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने काफी हल्के लैंडर बनाये है | लैंडर SLAM का वजन 700 किलोग्राम से कम है इसका वजन भारत के चन्द्रयान मिशन – 3 से भी कम है लेकिन इस मिशन में लगभग 102 मिलियन डॉलर खर्च हुआ जबकि भारत के चन्द्रयान मिशन – 3 का बजट 75 मिलियन डॉलर था |

 

जापान का मून मिशन कार्यक्रम क्यों महत्वपूर्ण है ?

भले ही यह जापान का पहला मून मिशन है लेकिन यह नहीं की यह जापान की पहली अन्तरिक्ष यात्रा है, इससे पहले जापान के 14 अन्तरिक्ष यात्री अन्तरिक्ष में जा चुके है | जापान ने 2020 में नासा के आर्टेमिस मिशन में चंद्रमा के सतह में अपने अन्तरिक्ष यात्रियों को भेजने का लक्ष्य रखा था | इस मिशन इस लिए भी खास है की इससे चीन की अन्तरिक्ष में पढ़ती  मौजूदी पर नजर रखा जायेगा |

 

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