gauraiyaa diwas : गौरैया दिवस की पूरी जानकारी देखे यहाँ

 

gauraiyaa diwas  | गौरैया पक्षी

पक्षी हमारे दुनिया का एक बहुत ही महत्वपूर्ण जीव् है जो दुनिया में अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है | इसी में एक पक्षी का नाम है गौरैया जो आमतौर पर हर घर में सुबह – शाम चहचहाते दिखाई पड ही जाते है | ये वो पक्षी है जिनकी आवाज सुनकर हमारी सुबह और शाम होती है | आज कल ये पक्षी गाँव तक में नजर नही आते है | आज ये पक्षी हम मनुष्य की निर्दयिता के कारण विलुप्त होते जा रहे है | इन्ही नन्ही गौरैया पक्षी को बचाने के लिए हर साल दुनिया भर में 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है |

गौरैया पक्षी का वैज्ञानिक नाम पेसर डोमेस्टिकस है | यह पक्षी अन्टार्कटिका के अलावा लगभग सभी महाद्वीपों में पाया जता है | इनमे नर और मादा दोनों होते है मादा गौरैया एक बार में 3 से 5 अंडे दे सकती है | इनके अंडे में से 10 से 12 दिनों के अन्दर बच्चे निकल जाते है | गौरैया पक्षी के बच्चे 15 से 18 दिनों में उड़ना सिख जाते है | गौरैया लगभग 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ सकती है |  इस नन्ही पक्षी की लम्बाई लगभग 14 से 16 सेंटीमीटर तक होती है |  इस पक्षी का वजन करीब 24 से 39 ग्राम की होती है |

गौरैया को भारत की राजधानी कही जाने वाली दिल्ली की राजकीय पक्षी कही जाती है | इसके चहचहाने की आवाज काफी शांत और खुशमिजाज होती है | दुनिया में इस पक्षी की मात्र 43 प्रजाति है | जो लगातार खत्म होनर के कगार पर है | छोटे आकर की ये नन्ही पक्षी 5 से 7 साल तक ही जीवित रह पाती है | गौरैया एक ऐसी पक्षी है जो एशिया और यूरोप में आसानी से पाई जाती है | गौरैया अपना अपना घोसला अप्रैल से अगस्त महीने में बनाते है |

दुनिया में अब केवल गौरैया की 26 प्रजाति ही बची है इनमे से 5 प्रजाति तो अकेले भारत में है | सन 2013 में बिहार सरकार ने गौरैया पक्षी के अपना राजकीय पक्षी घोषित किया है | गौरैया जमीन में सरपट चलने के बजाए उछल – उछल कर चलती है

गौरैया पक्षी
गौरैया पक्षी

 

गौरिया पक्षी का आहार

गौरैया बहुत ही छोटी होती है | ये पक्षी अपना आहार इंसानी घर से और बहार दोनों से प्राप्त करती है | ये पक्षी आमतौर पर घरो में पड़े अनाज के दाने , रोटी के टुकडे , आटे की गोलिया आदि खाती है इसके अतिरिक्त ये पक्षी छोटे छोट किट पतंगों को भी अपना निवाला बनाती है | जैसे सुंडी , इल्ली आदि |

गौरैया पक्षी की उम्र

गौरैया की औसत आयु 5 से 7 वर्ष की होती है | लेकिन के अपवाद स्वरूप एक गौरैया पक्षी डेनमार्क में 19 साल तक जीवित रहकर विश्व रिकोर्ड बना दिया | इसके अतिरिक्त इस पक्षी के नाम 23 साल तक जीवित रहने का रिकोर्ड भी है | लगातार बाद रहे प्रदुषण ने इन पक्षियों के साथ साथ अन्य पक्षियों को भी भारी नुकसान  पहुँचाया है |

विश्व गौरैया दिवस का इतिहास

विश्व गौरैया दिवस भारत की नेचर फॉरएवर सोसाइटी द्वारा फ़्रांस के इको – एस.आई.एस. फाउडेशन और दुनिया भर के कई संगठनो के साथ शुरू की गयी एक पहल है | यह मुख्य रूप से गौरैया के बारे में जागरूकता बढ़ने के लियी मनाया जाता है | | लेकिन इनमे अन्य पक्षियों की सुन्दरता और जैव विविधता भी शामिल है | ये दुनिया में खाद्य श्रृंखला को संतुलित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है |

समर्पित संरक्षण वादी मोहम्मद दिलावर जी ने नासिक में घरेलु गौरैया पक्षी के संरक्षण के लिए एक अभियान शुरू किया | इस अभियान को आधिकारिक बनाने का विचार नेचर फॉरएवर सोसाइटी के कार्यलय में एक औपचारिक चर्चा के दौरान पैदा हुआ | इसके बाद दुनिया भर् में 2010 में पहली बार विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है | येलो थ्रोट गौरैया और फॉक्स गौरैया

यूरेशियन गौरैया और अमेरिकन गौरैया 
यूरेशियन गौरैया और अमेरिकन गौरैया

 

गौरैया की प्रमख प्रजातिया

  1. यूरेशियाई वृक्ष गौरैया (Eurasian tree sparrow) – ये पेसर मोटैनस प्रजाति का गौरैया है | यूरेशियाई ट्री गौरैया मोटे चोंच वाला एक छोटा पक्षी है | इसका सर और गर्दान लाल – भूरे रंग का होता है | साथ ही सफ़ेद गाल पर काला धब्बा भी होता है | यह प्रजाति जादातर ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है |
  2. अमेरिकन वृक्ष गौरैया (American tree sparrow) – गौरैया की यह प्रजाति अमेरिका में पायी जाती है | इसकी पहचान है की इसके सर पर जंग के रंग की टोपी जैसा पैटर्न बना होता है इसकी 2 रंग वाली चोंच , जो उपरी हिस्से में गहरी पर गहरी भूरे रंग की और निचले हिस्से में पीले रंग की होती है | यह गौरैया सुखी घास से बीज निकालने में माहिर होती है |
  3. येलो थ्रोट गौरैया (Yellow throt sparrow) – यह दूसरी गौरैया से थोड़ी अलग होती है | इसके गले पर पीले रंग का धब्बा होता है | ये जादातर एशिया में पायी जाती है |
  4. फॉक्स गौरैया (Fox sparrow) – फॉक्स गौरैया का नाम इसके लाल और नारंगी रंग के कारण रखा गया है |गौरैया की यह प्रजाति उत्तरी अमेरिका में पायी जाती है |
  5. लार्क गौरैया (larc sparrow) – बड़े आकर की यह गौरैया की पहचान बहुरंगी सर है इसमें सफ़ेद , काला , भूरा और गहरा भूरा रंग शामिल है | इसकी छाती पर कला धब्बा होता है | लार्क गौरैया भी अमेरिका में पायी जाती है |
येलो थ्रोट गौरैया और फॉक्स गौरैया 
येलो थ्रोट गौरैया और फॉक्स गौरैया

 

गौरैया के विलुप्ति क्र प्रमुख कारण

गौरैया पक्षी के विलुप्ति के कई कारण हो सकते है जिनमे निम्न प्रमुख है –

  1. जगह जगह मोबाईल टावर का लगना
  2. वायु प्रदुषण
  3. जल प्रदुषण
  4. पेड़ – पौधों की निरंतर कटाई
  5. जलवायु परिवर्तन
  6. ग्लोबल वार्मिंग
  7. इन्टरनेट स्पीड को बढाने से
लार्क गौरैया (larc sparrow)
लार्क गौरैया (larc sparrow)

 

ये पक्षी हमारी दुनिया के लिए बहुत ही मत्वपूर्ण है ये हमारे जीवन को स्थिर बनाये रखती है इनसे हमारी सुबह और इन्ही से हमारी शाम होती है कम से काम मानवता का परिचय देते हुए गर्मी के दिनों में इन पक्षियों के लिए ठंडा पानी तो अपने अपने घर के पेड़ पर रख ही सकते है |

 

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