INSAT-3DS Satellite Of ISRO : इसरो का INSAT-3DS सैटेलाइट देखिये इसके बारे में सारी जानकारी

INSAT-3DS Satellite : INSAT-3DS सैटेलाइट

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 17 फरवरी 2024 को शाम के 5.35 बजे INSAT-3DS सैटेलाइट को लांच किया गया| यह भारत का तीसरी पीढ़ी का मौसम विज्ञानं उपग्रह है,इसे मौसम की भविष्यवाणी और आपदा के बारे में बताने या जानकारी देने के लिए बनाया गया है| ISRO ने इस सैटेलाइट को श्रीहरिकोटा सतीश धवन स्पेस सेंटर से GSLV-F14 रोकेट के जरिये लांच किया गया| यह सैटेलाइट पृथ्वी के चारो ओर चक्कर लगाकर मौसम का बेहद सटीक अनुमान लगाकर हमे जानकारी प्रदान करेगा| इस सैटेलाइट पर करीब 500 करोड़ रुपये का खर्च आया है| यह INSAT-3D सीरीज का 7 वा मिशन है| इसका आखिरी सैटेलाइट INSAT-3DR 8 सितम्बर 2016 को भेजा गया था| यह इसरो के मुताबिक लगभग 10 साल तक मौसम की जानकारियो देगा| इसका वजन 2274 किलोग्राम है| इसे ISRO ने ही बनाया है|

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INSAT-3DS Satellite

Work Of INSAT-3DS : क्या काम है INSAT-3DS का

यह सैटेलाइट एक बार चालू होने के बाद पृथ्वी विज्ञान, मौसम विज्ञान, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ ओशन टेक्नोलॉजी, मौसम पूर्वानुमान केंद्र और भारतीय राष्ट्रिय केंद्र के तह विभिन्न विभागों को सहायता और सेवा प्रदान करेगा|  INSAT-3DS में चार पेलोड लगे है जिनका काम अलग-अलग है| पहला पेलोड इमेजर पेलोड है जिसका काम पृथ्वी और उसके वातारण की फोटो खींचने में सक्षम होगा| दूसरा पेलोड साउंडर पेलोड है, जिसका काम वातारण के तापमान और ह्यूमिनिटी की जानकारी प्रदान करेगा| तीसरा पेलोड डाटा रिले ट्रांसपोंडर पेलोड है, जिसका काम डेटा को अपने पास लेकर अम्प्लिफाय करेगा फिर उसे वापस पृथ्वी पर भेजेगा| चौथा पेलोड SASR ट्रांसपोंडर है, जिसका काम सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करने में मदद करेगा|

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INSAT-3DS Satellite Equipment (उपकरण)

 

What is INSAT Series : INSAT श्रृंखला क्या है

भारतीय राष्ट्रिय उपग्रह प्रणाली (इन्सैट) की शुरुआत 1983 में हुई थी| यह दूरसंचार, मौसम विज्ञान, और खोज और बचाव कार्यो के लिए इसरो द्वारा बनाया गया एक बहुउद्देशीय भुस्थातिक उपग्रहों की एक सीरीज है| इन्सैट, एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे बड़ी घरेलु संचार प्रणाली है| अब तक इस सीरीज के 6 सैटेलाईट लांच किया जा चूका है| 2024 में लांच हुआ INSAT-3DS मौसम की भविष्यवाणी और आपदा चेतावनी के साथ ही भूमि और महासागरो की निगरानी के लिए भी काम करेगा| INSAT-3B मुख्या रूप से व्यावसायिक संचार, मोबाइल संचार, और विकासात्मक संचार के लिए काम करता है| यह इन्सैट के प्रसिक्षण और विकासात्मक संचार को बढ़ने में सहायक होता है| सैटेलाईट की निगरनी और नियंत्रण कर्नाटक के हासन और मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित मेन कंट्रोल सेंटर्स से किया जाता है| INSAT-3DS साइक्लोन के बारे में भी जानकारी प्रदान करेगा, इससे तूफान से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है|

About INSAT-3DR : इन्सैट-3डीआर के बारे में 

इन्सैट सीरीज का आखिरी सैटेलाईट INSAT-3DR था, जिसे 2016 को लांच किया गया था| इसका मुख्य उद्देश्य जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के लिए एक ऑपरेशनल वातावरणीय और साइक्लोन अलर्ट सिस्टम देना है| यह अभी पृथ्वी की सतह, समुद्र से की जाने वाली लौन्चिंग की निगरानी कर रहा है| यह डाटा टेलीकास्ट सेवाएं भी प्रदान करता है| डेटा प्रोसेसिंग के लिए सुविधा अहमदाबाद में स्थापित किया गया है| INSAT-3DR से मौसम की सटीक जानकारी मिल रही है, जिसके कारन हमे मौसम के बारे में काफी मदद मिल रही है| यह सैटेलाईट 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से हर 26 मिनट में पृथ्वी की फोटो खिंच रहा है| इसके साथ ही विकिरने, समुद्री सतह के तापमान, बर्फ की सतह, और कोहरे की भी जानकारी प्रदान करता है| यह जमीन से 70 किलोमीटर तक तापमान नाप रहा है| इसकी वजह से दुसरे देशो के ऐसे तकनीको पर भारत की निर्भरता बहुत कम हो गयी है|

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