Increasing Population And Its Side Effects : बढती जनसँख्या और उसके दुस्परिणाम देखिये सबकुछ

population : जनसँख्या

population एक ऐसा शब्द जिसका विस्तार शब्द के साथ-साथ उसका परिणाम भी बहुत तेजी से हो रहा है|  किसी क्षेत्र में निवासरत मनुष्यों की संख्या जो सामूहिक रूप से रहते है, जनसँख्या कहलाती है| जनसँख्या वहां की आबादी होती है| पूरी दुनिया में लगभग 8 अरब से ज्यादा जनसँख्या है | यह दर्शाता है की जनसँख्या कितनी तेजी से बढ़ रहा है|

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Population

population of India :  भारत की जनसँख्या

भारत जनसँख्या के मामले में दुनिया में पहले नंबर पर है| कुछ दिन पहले ही भारत ने चीन को जनसँख्या के मामले में पीछे छोड़ दिया था| चीन की आबादी तो धीरे-धीरे कम हो रही है पर भारत की आबादी धीरे-धीरे और बढ़ रही है| भारत की जनसँख्या 2011 जनगणना के अनुसार उस समय 121 करोड़ थी लेकिन यह इतनी तेजी से बढ़ा की संयुक्त राष्ट्र आंकड़ो के अनुसार 6 अप्रैल 2024 तक भारत की आबादी 1,438,625,371 हो गयी थी| जो और बढ़ रहा है|

reason for increasing population : बढती जनसँख्या का कारण

  • सबसे बड़ी बात अशिक्षा है| लोगो को इन सबके बारे में कम जानकारी पता है, जिससे वे जनसँख्या से होने वाले प्रभाव के बारे में ज्यादा नहीं जान पाते|
  • population के तेजी से विस्तार के कारण होने वाले दुस्परिणाम की जानकारी से वंचित रहना |
  • लोगो को जागरूक न करना व लोगो में जागरूकता न होना |
  • अपने वंश को बढाने के लिए |
  • अपने अत्यधिक संपत्ति का उत्तराधिकारी बनाने के लिए |
  • बेटे की चाहत रखना जिससे बच्चो की संख्या में वृद्धि हो जाती है |
  • बुढ़ापे में कोई सहारा होना चाहिए करके | आदि|
  • लोभ, कामवासना और अपने स्वार्थ के कारण |
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side effects of increasing population : बढती जनसँख्या के दुस्परिणाम

  • increasing population  का सबसे बड़ा दुस्परिणाम प्रकृति और स्वयं मनुष्य को झेलना पड रहा है|
  • बढती जनसँख्या के कारण प्रकृति का अत्यधिक दोहन बढ़ गया है|
  • जनसँख्या वृद्धि के कारण ही तेजी से वनों की कटाई हो रही है, प्रदुषण बढ़ रहा है |
  • संसाधनों की तेजी से कमी हो रही जिससे आने वाले समय में इसके लिए अत्यधिक संघर्ष करना पड़ेगा |
  • बढती जनसँख्या के कारण बहुत तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है जिसके कारण हमारी पृथ्वी का तापमान बहुत तेजी से बढ़ रहा है |
  • ऐसे ही जनसँख्या बढ़ता रहा तो प्रदुषण भी बढ़ता रहेगा, यह मनुष्य ही है जिसने अपने स्वार्थ के लिए इतने सारे पेड़ काट दिए, बड़े-बड़े उद्योग लगा दिए, जलो में कूड़ा-कचरा डाल दिए |
  • बढती जनसँख्या के बारे में लोगो को ही सोचना पड़ेगा की स्वयं को क्या करना है, क्योंकि यह किसी एक लिए संभव नहीं है और न ही कोई एक इसे फॉलो करेगा तो सब ठीक हो जायेगा, इसे सब को समझना होगा |
  • इसी बढती जनसँख्या के कारण सभी लोगो को नौकरियां नहीं मिल रही है| प्रतियोगिता अत्यधिक बढ़ रही है|
  • यही जनसँख्या है जिसने बड़े-बड़े कारखाने लगा दिए जिससे वायु से लेकर जल तक सबको प्रदूषित कर रहा है | जल संकट उभरकर सामने आ रहा है, उदाहरण के लिए बेंगलुरु, चेन्नई ये ऐसे शहर है जहाँ कुछ दशक पहले यहाँ जल की अत्यधिक मात्रा उपलब्ध थी | पर आज के समय में यह शहर जल संकट से गुजर रहा है|

यह जनसँख्या अगर ऐसे ही तेजी से बढ़ता रहा तो आने वाले कुछ सालो में हमें भारी नुकसान झेलना पड सकता है|  जनसँख्या पर नियंत्रण स्वयं मनुष्य ही कर सकता है| खुद को समझना होगा की हमें और प्रकृति को बचाने के लिए क्या करना होगा | अगर यह नहीं रुका तो बहुत तेजी से जलवायु परिवर्तन, जल संकट, वायु प्रदुषण, वनों की कटाई, अनियमित बारिश, सुखा, आदि बहुत से दुस्परिणाम सामने आएंगे, जो अभी से दिखने लग गए है|

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