facts about Mahadev : महादेव के बारे में देखिये उनसे जुड़े तथ्य और सवाल जो आपको जानना चाहिए

mahadev : महादेव

महादेव, जो पुरे संसार के सर्वोच्च माने जाने वाले हम सब के भगवान है| यह भगवान शिव के प्रति एक सम्मान है| Mahadev शब्द संस्कृत है जिसका अर्थ “महान देवता” से है| इसलिए भगवान शंकर को देवो के देव महादेव कहते है| ये अनंत है| प्रारंभ भी यही है और अंत भी यही है| ये वैराग्य है जो तप में लीन रहते है| इन्हें संघारक भी कहते है| इन्हें कई नामो से पुकारा जाता है जैसे – भोलेनाथ, शंकर, महेश, रूद्र, नीलकंठ, गंगाधर, आदि| आइये देखते है facts about mahadev :-

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Mahadev

facts about mahadev : महादेव के बारे में तथ्य

  • महादेव के मस्तक पर बना हुआ चन्द्र समय का प्रतिक होता है|
  • महादेव के त्रिनेत्र है| पहला सत्वगुण, दूसरा रजोगुण, और तीसरा तमोगुण का प्रतिक है|
  • भगवान शंकर के आंसुओ से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई है|
  • महादेव के तीनो नेत्रों में भूतकाल, भविष्यकाल और वर्तमानकाल समाहित है|
  • ग्रंथो के अनुसार जब-जब महादेव अपना तीसरा नेत्र खोलते है तब नए युग का सूत्रपात आरंभ होता है|
  • भगवान शंकर हमेशा योग मुद्रा में रहते है|
  • महादेव के दिल में हमेशा राम नाम रहता है|
  • महादेव हमेशा तप में लीन रहते है|

questions related to mahadev : महादेव से जुड़े सवाल और उनके जवाब

प्रश्न 1. महादेव की हमेशा आधी परक्रमा या चक्कर क्यों लगाया जाता है?

उत्तर :- देखिये शिवलिंग दो भागो का बना होता है, पहला लिंग और दूसरा जलाधारी| जलाधारी को पार नहीं करना चाहिए| जब हम लोग शिवलिंग पर जल चढाते है तो वह जलाधारी से होते हुए निचे की ओर प्रवाहित होती है, अगर हम [पूरी परिक्रमा करेंगे तो जल पर हमारा पैर लगेगा जो अशुभ रहेगा इसलिए जलाधारी तक पहुंचना ही परिक्रमा का पूर्ण होना है|

प्रश्न 2. महादेव पर जल-दूध का अभिषेक क्यों किया जाता है?

उत्तर :- जब समुद्र मंथन हुआ था, तो उसमे जो हलाहल नाम का जो विष निकला था, इस विष को महादेव ने अपने कंठ में धारण कर लिया था| विष के कारन शंकर जी के शरीर बहुत गर्म हो गया था| इसी गर्मी को शांत करने के लिए उनमे दुश और जल चढ़ाया जाता है और बिल्व पत्र, दही, घी आदि इन्हें शीतलता प्रदान करती है|

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प्रश्न 3. महादेव को भस्म क्यों चढ़ाया जाता है?

उत्तर :- शिव जी अपने शरीर पर भस्म लगाते है| जब सृष्टि का अंत होगा तो अंत में राख ही बचेगा| सृष्टि समाप्त  होने के बाद प्राणियों की आत्मा शिव जी में समाहित हो जाती है|  उनके लिए सब एक समान है|

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प्रश्न 4.  क्या हम खंडित शिवलिंग की पूजा कर सकते है?

उत्तर :- खंडित शिवलिंग की पूजा कर सकते है| शिवलिंग महादेव का निराकार स्वरूप है| इस कारन हम खंडित शिवलिंग की पूजा कर सकते है|

प्रश्न 5. शिवलिंग या शिव जी पर तुलसी क्यों नहीं चढ़ता?

उत्तर :- महादेव की पूजा में तुलसी नही रखी जाती है| इसका कारन यह है की महादेव ने तुलसी के पति शंखचुड जो एक असुर था उसका वध किया था | तुलसी के पुण्य कर्मो की वजह से कोई भी देवता उसे नहीं मार सकता था, लेकिन विष्णु जी ने तुलसी के पतिव्रता धर्म को भंग किया और महादेव ने फिर शंखचुड का वध किया|  इस छल की वजह से उसने संकल्प लिया की वह महादेव की पूजा में शामिल या उपयोग नहीं होगा| और विष्णु जी पत्थर बन जाने का शाप दे दिया, शालिग्राम विष्णु जी का ही पत्थर स्वरूप है|

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